Ganesh Chaturthi 2022 - गणेश चतुर्थी कब है? जानें शुभ मुहूर्त, तिथि, और पूजा विधि
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Ganesh Chaturthi 2022 - गणेश चतुर्थी कब है? जानें शुभ मुहूर्त, तिथि, और पूजा विधि

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Ganesh Chaturthi 2022 - गणेश चतुर्थी कब है? जानें शुभ मुहूर्त, तिथि, और पूजा विधि

गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है, मुख्य रूप से भारत मे मनाया जाता है। यह पर्व हर वर्ष 10 दिनों तक मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व भाद्र पक्ष में मनाया जाता है जो आम तौर पर अगस्त से सितंबर के मध्य में आता है। यह पर्व महादेव के छोटे पुत्र और विगन्हरथा भगवान गणेश के जन्मदिन का प्रतीक है।


गणेश जी को धन, विज्ञान, ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि के देवता के रूप में जाना जाता है, और इसीलिए अधिकांश जातक उन्हें याद करते हैं और कोई भी महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से पहले उनका आशीर्वाद लेते हैं। भगवान गणेश को 108 अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे गजानन, विनायक, विघ्नहर्ता, आदि। इस वर्ष यानिकी 2022 मे यह पर्व 31 अगस्त को मनाया जाएगा। 


गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त 


गणेश चतुर्थी - बुधवार, अगस्त 31, 2022 को

मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त - 11:05 प्रातःकाल से 01:38 दोपहर 

अवधि - 02 घण्टे 33 मिनट 

गणेश विसर्जन- शुक्रवार, सितम्बर 9, 2022 को

एक दिन पूर्व, वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 03:33 दोपहर से 08:40 रात्री, अगस्त 30

अवधि - 05 घण्टे 07 मिनट

वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 09:26 प्रातःकाल से 09:11 रात्री 

अवधि - 11 घण्टे 44 मिनट



गणेश चतुर्थी इतिहास


  • भगवान गणेश भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। उनके जन्म के पीछे की कथाओ का वर्णन किया गया है लेकिन ऐसी दो कथा है जो की ज्यादा प्रचलित है। 

  • पहली कथा के अनुसार, भगवान गणेश को माता पार्वती ने भगवान शिव की अनुपस्थिति में अपनी रक्षा करने के लिए अपने शरीर के पसीने से बनाया था। 

  • जब माता पार्वती स्नान कर रही थी तो उन्होंने गणेश जी को अपने स्नान कक्ष के द्वार की रखवाली करने का काम सोपा। इस बीच, शिव घर लौट आए और गणेश, जो नहीं जानते थे कि शिव कौन हैं, उन्हे अंदर आने से रोक रहे थे।

  • इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने क्रोध मे आकार गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया। जब यह बात माता पार्वती को पता चली तो वे क्रोधित हो गईं। बदले में भगवान शिव ने गणेश को वापस जीवन देने का वादा किया। 

  • ब्रह्मा जी ने उन्हे उत्तर की ओर एक बच्चे के सिर की तलाश करने के लिए भेज दिया, लेकिन उन्हें केवल एक हाथी का सिर मिला। शिव जी ने हाथी का सिर गणेश जी के मानव शरीर के धड़ से जोड़ दिया। ऐसे हुआ भगवान गणेश का जन्म। 

  • अन्य लोकप्रिय कहानी यह है कि देवों ने शिव और पार्वती से गणेश जी को बनाने का अनुरोध किया ताकि वह राक्षसों के लिए विघ्नकार्ता (बाधाओं का निर्माता) बन सकें, इस प्रकार भगवान गणेश का जन्म हुआ और वे विघ्नहर्ता (बाधाओं को दूर करने वाले) बने और देवों की मदद करने लगे। 



गणेश चतुर्थी का महत्व


  • ऐसा माना जाता है कि जो भक्त भगवान गणेश की पूजा करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। तो, गणेश चतुर्थी का मुख्य सार यह है कि जो भक्त उनकी पूजा करते हैं, उनके जीवन की सभी परेशानियाँ जल्द दूर हो जाती है।

  • भगवान गणेश उन्हे ज्ञान के मार्ग पर ले जाता है।

  • ऐतिहासिक रूप से, यह त्योहार राजा शिवाजी के समय से मनाया जाता रहा है। 

  • यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान था कि लोकमान्य तिलक ने गणेश चतुर्थी को एक निजी उत्सव से एक भव्य सार्वजनिक उत्सव में बदल दिया, जहाँ समाज की सभी जातियों के लोग एक साथ आ सकते हैं और भगवान गणेश से प्रार्थना कर सकते हैं। 

  • वर्षों से बढ़ती पर्यावरण जागरूकता के साथ, लोगों ने गणेश चतुर्थी को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाना शुरू कर दिया है। 

  • इसमें प्राकृतिक मिट्टी से गणेश की मूर्तियाँ बनाई जाती है और पंडालों को सजाने के लिए केवल फूलों और प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग होता है। 


विनायक चविथि के अनुष्ठान


चार मुख्य अनुष्ठान हैं जो 10 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान किए जाते हैं। वे हैं- प्राणप्रतिष्ठा, षोडशोपचार, उत्तरपूजा और गणपति विसर्जन।


  • गणेश चतुर्थी का उत्साह वास्तव में त्योहार शुरू होने से कुछ सप्ताह पहले होता है। 

  • गणेश की मूर्तियों को घरों, मंदिरों या इलाकों में खूबसूरती से सजाए गए 'पंडाल' में स्थापित किया जाता है। प्रतिमा को फूलों, मालाओं और रोशनी से भी सजाया जाता है। 

  • प्राणप्रतिष्ठा नामक एक अनुष्ठान मनाया जाता है जहां एक पुजारी भगवान गनेश से सभी के जीवन का आह्वान करने के लिए मंत्र का जाप करते है।

  • फिर 16 अलग-अलग तरीकों से गणेश जी की पूजा की जाती है। 

  • इस अनुष्ठान को षोडशोपचार कहा जाता है।

  • लोग गीत गाकर या बजाकर, ढोल की थाप पर नाचकर और आतिशबाजी करके जश्न मनाते हैं। 

  • उत्तरपूजा अनुष्ठान तब किया जाता है जब गणेश जी को सम्मान के साथ विदाई दी जाती है। 

  • इसके बाद गणपति विसर्जन होता है।

  •  यह एक अनुष्ठान हैं जिसमें भगवान गणेश की प्रतिमा को पानी में विसर्जित किया जाता है। 

  • मूर्ति को समुद्र में ले जाते समय और विसर्जित करते समय, लोग आम तौर पर 'गणपति बप्पा मोरया, पुरच्य वर्षी लौकारिया' का जाप करते हैं, जिसका अर्थ है 'अलविदा भगवान, कृपया अगले साल वापस आएं'।

  • जहां कुछ भक्त इस त्योहार को घर पर मनाते हैं, वहीं अन्य लोग सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश के दर्शन करते हैं। 

  • लोग गणेश जी को अपना उचित सम्मान, प्रार्थना और प्रसाद चढ़ाते हैं। दोस्तों, परिवार और आगंतुकों के लिए भगवान गणेश के पसंदीदा मोदक, पूरन पोली और करंजी जैसे व्यंजन तैयार किए जाते हैं।


पूजा विधि


  • दिलचस्प बात यह है कि देश के हर क्षेत्र में इस त्योहार को मनाने का एक अनूठा तरीका है। 

  • हालाँकि मूल अनुष्ठान के अनुसार पूजा स्थल की सफाई करके मंदिर या पूजा स्थल को फूलों से सजाय जाता है। 

  • साथ ही मंदिर को रौशनी से सजाकर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती है। 

  • कुछ स्वादिष्ट भोग तैयार किए जाते है और भजन गाए जाते है। 

  • अब भगवान गणेश की आरती विधि विधान से कड़ी जाती है। 

  • आरती के बाद भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया जाता है। 



भगवान गणेश मूर्ति स्थापना विधि 


भक्त पूजा स्थल को साफ और सजाते हैं, जिसके बाद भगवान गणेश की मूर्ति को लाल कपड़े पर रखते हैं। फिर मूर्ति के सामने एक पानी का बर्तन, नारियल, इलायची, पंचामृत, रोली, अक्षत और लौंग को अनुष्ठान के लिए खूबसूरती से व्यवस्थित किया जाता है। इसके अलावा पूजा की अन्य आवश्यक चीजें जैसे सुपारी, कलावजनेउ, चंडी का वर्क, घी, कपूर, पंचमेवा, गंगाजल, चौकी और हल्दी और कुमकुम की व्यवस्था की जाती हैं। 


गणेश चतुर्थी के लिए भोजन


अच्छे भोजन के लिए भगवान गणेश के प्रेम का उल्लेख पौराणिक कथाओं में भी मिलता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान गणपति को मोदक और लड्डू बहुत पसंद थे, यही कारण है कि इस त्योहार का उत्सव बिना मीठे व्यंजन के अधूरा है। कई अन्य मीठे व्यंजन जैसे खारवास, श्रीखंड, बासुंडी, खीर, रबड़ी, हलवा, आदि तैयार किए जाते हैं और भगवान गणेश को भोग के रूप में पेश किए जाते हैं ।


गणेश विसर्जन


गणेश चतुर्थी के 10 वें दिन, अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है।  इस दिन भक्त गीत और नृत्य करते हुए भगवान गणेश को विदाई देने हैं। गणेश विसर्जन के लिए भक्त इकट्ठा होते हैं और विशाल जुलूस निकालते हैं। अंत मे भगवान गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जित करके उनसे अगले वर्ष जल्दी आने की प्रार्थना करते है। 


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