Krishna Janmashtami 2022 - कब है कृष्ण जन्माष्टमी? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
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Krishna Janmashtami 2022 - कब है कृष्ण जन्माष्टमी? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Krishna Janmashtami 2022 - कब है कृष्ण जन्माष्टमी? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व श्री कृष्ण के जन्मदिन के रूप मे मनाया जाता है। सम्पूर्ण देश भर मे इस पर्व को बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रोहिणी नक्षत्र के समय भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था इसी कारणवश हर वर्ष भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को मनाया जाता है। इस वर्ष 2022 मे यह पर्व 18 अगस्त यानि गुरुवार के दिन पड़ रहा है। इस वर्ष की कृष्ण जन्माष्टमी और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन वृद्धि योग भी बन रहा है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप यानि लड्डू गोपाल जी की पूजा की जाती है। आइए जानते है की कब है कृष्ण जन्माष्टमी और इस दिन का क्या महत्व है। 


कृष्ण जमाष्टमी 2022 शुभ मुहूर्त 


  • निशीथ पूजा मुहूर्त :12:03:00 से 12:47:42 तक

  • अवधि: 0 घंटे 43 मिनट

  • जन्माष्टमी पारणा मुहूर्त: 05:52:03 के बाद 20, अगस्त को


कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व 


इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 18 अगस्त को मनाई जाएगी। भक्त इस शुभ अवसर को उपवास करके और भगवान कृष्ण की पूजा करके मनाते हैं। लोग अपने घरों को फूलों, दीयों और रोशनी से प्रकाशित करते हैं। मंदिरों को भी खूबसूरती से सजाया जाता है।


मथुरा और वृंदावन के मंदिर इस पर्व के सबसे असाधारण और रंगीन उत्सवों के साक्षी हैं, क्योंकि माना जाता है कि भगवान कृष्ण का जन्म इसी स्थान पर हुआ था और उन्होंने अपने बढ़ते हुए वर्षों को वहीं बिताया था। भक्त कृष्ण के जीवन की घटनाओं को फिर से बनाने और राधा के प्रति उनके प्रेम को मनाने के लिए रासलीला भी करते हैं। चूंकि भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए भगवान कृष्ण के बाल रूप यानिकी लड्डू गोपाल जी की मूर्ति को नहलाया जाता है और पालने में विराजित किया जाता है।


देशभर मे लोग कृष्ण जी द्वारा बचपन मे की गई माखन से जुड़ी लीला के तहत मिट्टी के मटके से मक्खन और दही चुराने के लिए दही हांडी का आयोजन करते हैं। इस गतिविधि को दही हांडी उत्सव कहा जाता है, जिसके लिए एक मिट्टी के मटके को जमीन से ऊपर लटका दिया जाता है, और लोग उस तक पहुंचने के लिए एक मानव पिरामिड बनाते हैं और अंत मे इसे तोड़ देते हैं।


जन्माष्टमी का इतिहास


भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में भाद्रपद माह (अगस्त-सितंबर) में अंधेरे पखवाड़े के आठवें (अष्टमी) दिन हुआ था। वह देवकी और वासुदेव के पुत्र थे। जब कृष्ण जी का जन्म हुआ, तब मथुरा मे कृष्ण जी के मामा कंस का शासन था, जो एक आकाशवाणी से डरकर अपनी बहन के बच्चों को मारना चाहते थे, आकाशवाणी के अनुसार कंस की बहन का आठवां पुत्र उनकी मृत्यु का कारण बनेगा।


आकाशवाणी होने के पश्चात कंस ने अपनी बहन देवकी और उनके पति वासुदेव को कारागार मे कैद कर दिया था। कसं ने सबसे पहले अपनी बहन के छह बच्चों को मार दिया। हालांकि, उनके सातवें बच्चे बलराम के जन्म के समय भ्रूण रहस्यमई तरीके से देवकी के गर्भ से राजकुमारी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित हो गए। जब उनके आठवें बच्चे, श्री कृष्ण का जन्म हुआ, तब पूरा महल नींद में चला गया, और वासुदेव अपने पुत्र को वृंदावन में नंद बाबा और यशोदा के घर में छोड़ आए। 


विनिमय करने के बाद, वासुदेव एक बच्ची के साथ महल में लौट आए और उसे कंस को सौंप दिया। जब दुष्ट राजा ने बच्चे को मारने की कोशिश की, तो वह देवी दुर्गा में बदल गई, उसे उसके आसन्न विनाश के बारे में चेतावनी दी। इस तरह कृष्ण वृंदावन में पले-बढ़े और अंत में अपने मामा कंस का वध कर दिया।


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कृष्ण जन्माष्टमी व्रत विधि 


  • कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत मे अष्टमी तिथि के उपवास से पूजन और नवमी तिथि के पारणा से व्रत की समाप्ति होती है। 

  • व्रत से एक दिन पहले यानि सप्तमी के दिन सात्विक भोजन ग्रहण करे। 

  • उपवास वाले दिन सुबह प्रातःकाल उठकर स्नान करने के बाद देवताओ को प्रणाम करे और उत्तर या पूर्व दिशा मुख करके बैठे। 

  • अब हाथ मे जल, पुष्प और फल लेकर कृष्ण जी को अर्पण करे और मध्यान्ह के समय काले तिलं के जल से स्नान करे और माता देवकी के लिए प्रसूति ग्रह बनाए।

  •  अब एक सुंदर बिछौना बिछाए और शुभ कलश की स्थापना करे। 

  • अब पूजा करते समय माता देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, माता यशोदा और माता लक्ष्मी जी के नाम का स्मरण करे और विधिवत पूजन करे।

  • इस व्रत को रात्री 12 बजे के बाद ही खोला जा सकता है। 

  • इस व्रत के दौरान अनाज का सेवन नहीं किया जा सकता। 

  • आप कुट्टू के आटे की पकौड़ी, सिंघाड़े के आटे के हलवा, और मावे की बर्फ़ी का सेवन भी कर सकते है। 


जन्माष्टमी 2022 के खास योग 


  • जन्माष्टमी के दिन 18 अगस्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से लेकर 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजीत योग बनेगा।

  • 17 अगस्त दोपहर 08 बजकर 56 मिनट से 18 अगस्त रात 08 बजकर 41 मिनट तक वृद्धि योग रहेगा। 

  • 18 अगस्त रात 08 बजकर 41 मिनट से 19 अगस्त रात 08 बजकर 59 मिनट तक धुव्र योग रहेगा। 

  • 19 अगस्त को रात 10 बजकर 59 मिनट तब व्रत पारण का शुभ समय होगा। 


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