Garbh sanskar - प्रेग्नेंसी में गर्भ संस्कार का महत्व और विधि
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Garbh sanskar - प्रेगनेंसी में गर्भ संस्कार का महत्व और विधि

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Garbh sanskar - प्रेगनेंसी में गर्भ संस्कार का महत्व और विधि

मनुष्य जीवन को कुल 16 भावों मे विभाजित किया गया है जिन्हे 16 संस्कार कहते है। इन संस्कारों से एक गर्भ संस्कार भी है| गर्भ मे दिए

संस्कार शिशु के सम्पूर्ण जीवन मे काम आते है| माना जाता है की शिशु को गर्भ के समय संस्कार दिया जा सकता है| हर माता पिता चाहते

है की उनकी संतान संस्कारी, सुंदर, व समझदारी जैसे गुणों से धनी हो| परंतु हर माता पिता की यह ख्वाहिश पूरी नहीं हो पाती|


यदि शिशु शारीरिक रूप से मजबूत होता है तो जरूरी नहीं की वे मानसिक रूप से भी मजबूत हो| इसी वजह से आज के समय मे भारत के

करीब 40% लोग गर्भाधान संस्कार की मदद लेते है| गर्भ संस्कार एक वैदिक थेरेपी है जिसकी मदद से लोग अपने अजन्मे शिशु को संस्कार

ग्रहण करवाते है| तो आइए जानते है की क्या है गर्भ संस्कार?


क्या है गर्भ संस्कार 


मौजूदा समय मे लोग यह मानते है की उनके शिशु का मानसिक एवं शारीरिक विकास 1 से लेकर 3 साल के बीच हो जाता है परंतु यह

कथन सत्य नहीं है| मेडिकल साइंस मे बताया गया है की शिशु का विकास उनके गर्भ मे रहते समय ही हो जाता है|


किसी भी शिशु के जन्म के बाद उसके बेहतर स्वस्थ रहने के लिए स्वस्थ गर्भावस्ता का होना आवश्यक है| गर्भ का मतलब माँ की कोक

मे पल रहे शिशु से होता है एवं संस्कार का मतलब ज्ञान से है| स्पष्ट रूप से वर्णन करे तो गर्भ के समय देने वाली शिक्षा को गर्भ संस्कार

कहते है| 


गर्भ संस्कार का वैदिक इतिहास  


गरबावस्था के समय गर्भ संस्कार का अत्यधिक महत्व माना गया है| आप महाभारत का उद्धारण ले सकते है| जब भी हम गर्भ मे शिक्षा लेने की 

बात करते है तो हमारे मुख पर सबसे पहला नाम अभिमन्यु का ही आता है| जब अभिमन्यु अपनी माँ सुभद्रा की कोक मे थे तब अर्जुन ने माता 

सुभद्रा को चक्रव्यू भेदने की कला के बारे मे बताया था परंतु वे अर्जुन के पूरे व्यक्तव्य को सुनने से पहले ही सो गई थी| 


इसी कारणवश अभिमन्यु सांतवे चक्रव्यू को तोड़ने मे असमर्थ रहे थे| जब धृतराष्ट्र से नेत्रहीन होने के कारण उनका राजपाठ लेके पांडु को दे 

दिया गया तो वे क्रोधित हो गए और उनका यह क्रोध दस गुना बढ़कर दुर्योधन मे आया| दोस्तों जो आप प्रतिदिन क्रियाए करते है, 

उसका सीधा असर आपके अजन्मे शिशु पर होता है| इसलिए लोग गर्भसंस्कार की मदद लेते है क्योंकि इसके महत्व के बारे मे वेदों एवं 

गीता मे भी वर्णन किया गया है| 


कब शुरू करे गर्भ संस्कार की प्रक्रिया?

गर्भसंस्कार के समय सिर्फ माता एवं शिशु की सेहत का ध्यान रखना ही जरूरी नहीं, बल्कि शिशु के साथ आत्मीयसंबंध भी विकसित
करना आवश्यक है| जैसे ही स्त्री गर्भ धारण करती है, उसी समय से गर्भ संस्कार शुरू हो जाता है| उस समय अपने शिशु से बात करे एवं
उसे सकारात्मक कहानियां सुनाए| वैज्ञानिक द्वारा भी यह दावा किया गया है की गर्भ मे पल रहा शिशु हर आवाज को सुनकर उसपर प्रक्रिया देता है| इसलिए यह भी आवश्यक है की गर्भ के समय माता सकारात्मक सोच रखे| गर्भावस्ता से लेकर शिशु के 2 वर्ष की आयु होने तक
गर्भ संस्कार चलता है|  

 


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गर्भावस्था के समय गर्भसंस्कार से जुड़ी कुछ गतिविधिया


  • अच्छा आहार खाए 
  • व्यायाम करे 
  • सकारात्मक सोच रखे
  • गर्भ संवाद करे


गर्भ संस्कार का महत्व 


  • गर्भ संस्कार की मदद से आप गर्भ मे पल रहे शिशु के अंतर्मन मे सद्गुण का विकास कर सकते है|
  • गर्भ मे रहकर शिशु बाहर के प्रभावों की जानकारी ले सकता है|
  • गर्भ संस्कार की मदद से शिशु का मानसिक एवं शारीरिक विकास अच्छी तरह से होता है| 
  • गर्भ संस्कार प्राप्त करने वाले शिशु तेजस्वी, बुद्धिमान, निर्भय, संस्कारी एवं स्वस्थ होते है|
  • गर्भ संस्कार की मदद से गर्भावस्था के समय गर्भवती महिला परेशानियों से मुक्त रहती है|



समग्र गर्भावस्था का महत्व 


गर्भावस्था के समय मनुष्य को शरीर, आत्मा एवं अंतर्मन सहित सभी पहलुओ का ध्यान रखना चाहिए| समग्र गर्भावस्था से आप मन और

आत्मा के साथ-साथ भौतिक शरीर के प्रभाव को आसानी से पहचान सकते है|  शारीरिक स्वास्थ्य, मूल्य और विश्वास, रिश्ते, भावनात्मक

भलाई और आध्यात्मिकता गर्भावस्था के समय महिलाओ के स्वास्थ एवं शिशु के स्वास्थ को प्रभावित करते है| माना जाता है की समग्र

रूप से शिशु का जन्म उसकी सेहत, बुद्धि, शारीरिक गुण एवं सुंदरता पर सकारात्मक प्रभाव डालता है| इसलिए गर्भ संस्कार मे समग्र

प्रक्रियाओ का भी वर्णन किया जाता है| 



Prenatal Bonding है गर्भ संस्कार का महावपूर्ण भाग

Prenatal Bonding को हिन्दी मे प्रसव पूर्व संबंध कहते है| हर माँ चाहती है की उनके शिशु के साथ उनकी अच्छी bonding हो|
इसके लिए उन्हे 9 महीने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। गर्भावस्था के समय आप अपने शिशु के साथ bonding बनाना शुरू
कर सकते है| Prenatal Bonding आपके बच्चे के वास्तव में आने के बाद उनके विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

कैसे करे पेरेंटल बान्डिंग

  • गर्भावस्था के समय अपने शिशु से बात करने की कोशिश करे और उसके लिए लोरी या भजन गाए|
  • गर्भावस्था के समय अपने पेट की मसाज करे|
  • गर्भ के समय जब शिशु लात मारना शुरू करे तो अपने पेट को सहलाए|
  • गर्भावस्था के समय अपनी डायरी मे वे सब बातों को लिखे जो आपने गर्भावस्था के समय मे महसूस की है|
  • अपने पसंदीदा संगीत की मदद से खुद को रीलैक्स करे|


गर्भ संस्कार मे Prenatal Diet का महत्व

प्रेग्नन्सी के समय पोषण से भरपूर आहार खाना महत्वपूर्ण है| सब्जियां और फल, रोटी और अनाज, दूध, दही और पनीर आदि

आपके शिशु को पोषण तत्व प्रदान करेंगे| हर दिन खूब पानी पिए। 

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