शास्त्रों के अनुसार भोजन करने का सही तरीका
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शास्त्रों के अनुसार भोजन करने का सही तरीका

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शास्त्रों के अनुसार भोजन करने का सही तरीका

शास्त्रों के अनुसार भोजन करने का सही तरीका, जाने खाने का कौन-सा तरीका है नुकसानदायक

हमारे वेदों और शास्त्रों मे हर समस्या का समाधान है। चाहे हम वास्तु शास्त्र की बात करे या फिर वैदिक शास्त्र का वर्णन करे। सभी समस्या जिसका उत्तर आज के युग मे मनुष्य जानना चाहते है, शास्त्रों मे उनके संबंध मे वर्णन है। 

जिन बातों का वर्णन शास्त्रों मे किया गया है उसका उल्लेख आज के समय मे विज्ञान द्वारा किया जा रहा है। यह इस बात की पुष्टि करता है की शास्त्रों मे लिखी गई हर बात कई हद्द तक सत्य हो। हमारे हिन्दू शास्त्रों मे भोजन के संबंध मे किए गए कई तथ्यों का वर्णन किया है।

भोजन करते समय अच्छे वातावरण, आसन और अच्छी भावनाओं का होना भी आवश्यक है। शास्त्रों के मुताबिक यदि हमारे द्वारा भोजन करते वक्त सभी नियमों का पालन किया जाए तो हमे किसी प्रकार का रोग नहीं होता।

हिन्दू धर्म के अनुसार भोजन करते समय मन शुद्ध होना चाहिए, भोजन शुद्ध होना चाहिए और वायु शुद्ध होनी चाहिए। यदि यह सब भाव शुद्ध है तो व्यक्ति 100 साल तक जी सकता है। आइये इस लेख मे हम जानते है की शास्त्रों के मुताबिक क्या है भोजन करने के खास नियम।

वास्तु अनुसार भोजन करने की शुभ दिशा

  दक्षिण दिशा मे भोजन करना अशुभ माना जाता है क्योंकि इससे व्यक्ति के पांचन एवं कई प्रकार की सेहत से संबंधित समस्याओ का सामना करना पड़ सकता है।

  दक्षिण दिशा मे भोजन करने से व्यक्ति के मान सम्मान पर भी आघात पड़ता है।

  वास्तु शास्त्र के अनुसार सिर्फ भोजन के समय ही नहीं, बल्कि नहाते समय भी सर की दिशा उत्तर या उत्तर पूर्व मे होनी चाहिए।

  वास्तु शास्त्र के अनुसार भोजन करने से पूर्व हाथ, पैर और मुंह धोने से व्यक्ति की आयु बढ़ती है।

  टूटे या गंदे बर्तन मे खाना खाना अशुभ माना जाता है, यह जीवन मे दुर्भाग्य को बढ़ाता है।

  भोजन करते समय टांग हिलाना और हाथ मे थाली रखकर भोजन करना भी अशुभ माना जाता है।

  डाइनिंग टेबल को कभी खाली ना रखे।

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शास्त्र अनुसार भोजन करने से पूर्व इन पांच अंगों को रखे स्वच्छ

  शास्त्रों के अनुसार भोजन करने से पहले इन पांच अंगों को स्वच्छ रखने से होगी से आपके घर मे बरकत। यह पांच अंग है दो हाथ, दो पैर और मुख। शास्त्रों के अनुसार इन पांचों अंगों को धोकर ही भोजन करने बैठे।

  भोजन करने से पूर्व अन्नदेवता की स्तुति करे और प्रार्थना करे की “सभी भूखों को भोजन प्राप्त हो”

  भोजन बनाने से पूर्व स्नान करके, ईश्वर को नाम करके ही रसोई मे प्रवेश करे। खुद के लिए रोटी बनाने से पहले 3 रोटी कुत्ते, गाय और कौवे के लिए बनाकर अलग रख दे।

  प्रयास करे की घर के सभी सदस्यों के साथ बैठकर ही भोजन करे क्योंकि अलग अलग भोजन करने से परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम की भावना कम हो जाती है।

भोजन करने का शुभ समय

  शास्त्रों द्वारा भोजन करने का शुभ समय निर्धारित किया है।

  शास्त्रों द्वारा निर्धारित किए गए समय से भोजन करने से व्यक्ति स्वस्थ राहत है, घर मे वृद्धि होती है और एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

  शास्त्रों के अनुसार प्रातःकाल और सायंकाल के समय ही भोजन करना शुभ माना जाता है।

  शास्त्रों के अनुसार पांचनक्रिया की जठराग्नि सूर्योदय के दो घंटे बाद तक और सूर्यअस्थ से ढाई घंटे पूर्व प्रबल रहती है।

  शास्त्रों की माने तो जो दिन मे एक बार भोजन करता है उसे योगी कहते है और जो दो बार करता है उसे भोंगी कहते है।

शास्त्र अनुसार भोजन करने के अशुभ तरीके 

  सायं काल के समय, हाथ मे थाली रखकर और टूटे फूटे बर्तनों मे भोजन करना अशुभ माना जाता है।

  अधिक शोर मे, पीपल और वटवृक्ष के पेड़ के नीचे और मल-मूत्र करने के बाद भोजन करना उचित नहीं है।

  परोसे हुए भोजन की कभी निंदा ना करे।

  भय, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेषभाव, आदि के साथ किया गया भोजन आसानी से नहीं पचता।

  सिर ढंककर, जूते पहन कर और खड़े होकर भोजन नहीं करना चाहिए।

ऐसे भोजन का सेवन ना करे

  बहुत मीठा या तीखा भोजन ना करे।

  किसी के द्वारा छोड़े गए भोजन का सेवन ना करे।

  आधा खाया हुआ मिठाई, फल, आदि का पुनः सेवन ना करे।

  भोजन छोड़कर उठ जाने पर पुनः भोजन करने ना बैठे।

  अनादर युक्त परोसे गए भोजन का सेवन ना करे। 

भोजन करते समय करे यह काम

  भोजन ग्रहण करते समय मौन रहे, रात्री मे पेट भरकर खाना न खाए, भोजन करते समय सकारात्मक बाते करे।

  भोजन ग्रहण करते वक्त किसी समस्या के विषय मे वार्तालाप ना करे।

  भोजन को चबा चबा कर खाए। भोजन करते समय सबसे पूर्व मीठा, फिर नमकीन और अंत मे कड़वा भोजन खाए।

  सबसे पूर्व रसदार, फिर गरिष्ठ और अंत मे द्रव्य पदार्थ का सेवन करे।

  कम खाने वाले व्यक्तियों को आयु, बल, आरोग्य, सुख, और सौन्दर्य प्राप्त होता है। 

शास्त्रों के अनुसार क्या न खाए

  रात्री के समय, सत्तू, तिल, दही और गरिष्ठ भोजन का सेवन ना करे।

  दूध के साथ दही, नामक, आदि खाद्य पदार्थों का सेवन ना करे।

  दूध और खीर के साथ खिचड़ी का सेवन ना करे।

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