शिवलिंग पर क्यों चढ़ाते जाता है दूध?
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शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है दूध?

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शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है दूध?

शिवलिंग पर क्यों चढ़ाते जाता है दूध? समुद्र मंथन के बाद कैसे शुरू हुई यह परंपरा 


हमारे धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक श्रावण का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रावण मास में लगातार वर्षा होती रहती है और इसी कारणवश कई जगह छोटे-छोटे जीवो की उत्पत्ति होने लगती है। मिट्टी एवं घास में कई नई विषैली घास और वनस्पतियों की उत्पत्ति हो जाती है। जब दूध देने वाले पशु इन विषैली घास एवं वनस्पतियों का सेवन करते हैं तो दूध विश्व के समान हो जाता है। ऐसा दूध पीने से हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है इसलिए सावन के महीने में कच्चे दूध के सेवन नहीं करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर श्रावण के महीने में शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाने की प्रथा लंबे समय से चली आ रही है। तो आइए जानते है की शिवलिंग पर क्यों चढ़ाते जाता है दूध।  


क्यों चढ़ाया जाता है शिवलिंग पर दूध?


यदि हम शिव महापुराण को पढ़ेंगे तो हम यह जान पाएंगे कि सृष्टि के निर्माण से पहले केवल शिव जी का ही अस्तित्व था। भगवान शिव एक अपार शक्ति है जिनका ना कोई आदि है ना कोई अंत है। भगवान शिव की भक्ति मात्र से ही भक्तों को सभी सुख, धन लाभ, मान सम्मान, आदि की प्राप्ति होती हैं। भगवान शिव को भोलेनाथ, महाकाल, शंकर आदि के नाम से जाना जाता है। उनको भोलेनाथ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह अपने भक्तों की भक्ति से जल्द प्रसन्न हो जाते हैं।


भगवान शिव के प्रसन्न होने का मतलब यही है कि उनके भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के कई उपाय हैं जिसमें उनकी पूजा-अर्चना एवं आरती करना श्रेष्ठ माना जाता है। प्रतिदिन विधि विधान से भोलेनाथ की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं एवं शिव जी का आशीर्वाद सदैव उन पर बना रहता है। 


प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु महादेव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर गाय के कच्चे दूध को अर्पण करते हैं। गाय को हमारी माता माना जाता है अतः गौ माता का दूध पवित्र एवं पूजनीय होता है। इसे शिवलिंग पर चढ़ाने से महादेव प्रसन्न होते हैं एवं श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। गाय के दूध की प्रकृति शीतलता प्रदान करने वाली होती है अतः भगवान शिव को जो उन्हें शीतलता प्रदान करने वाली वस्तु अतिप्रिय होती हैं।


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साथ ही ज्योतिष में गाय के कच्चे दूध को चंद्र ग्रहण के समान माना गया है। चंद्र से संबंधित सभी दोषों को दूर करने हेतु प्रति सोमवार शिव जी को दूध अर्पण करना चाहिए। मनोवांछित फल पाने हेतु यह भी आवश्यक है कि आपका आचरण पूरी तरह से शुद्ध एवं धार्मिक हो। ऐसे होने से आपकी सभी मनोकामनाएं जल्द पूरी होती हैं।


जब संसार के हित के लिए शिव जी ने पी लिया था विष 


विष्णु पुराण मे एक कथा का जिक्र है जिसके मुताबिक समुद्र मंथन के समय अमृत प्राप्ति के लिए देवों और दानवों के बीच जंग छिड़ गई थी। दोनों पक्ष अमृत पाने के लिए जी जान लगा रहे थे। समुद्र मंथन के समय सबसे पहले हलाहल विष की प्राप्ति हुई। इस हलाहल विष की ज्वाला अत्यंत तीव्र थी। विष की इस तीव्रता से सभी देव और असुर जलने लगे। इस विष की ज्वाला इतनी तीव्र थी की इससे सम्पूर्ण संसार का विनाश हो सकता था।


कोई भी देव और असुर उस विष को सहन करने की शक्ति नहीं रखते थे इसलिए सब भगवान शिव की शरण मे आ गए। सृष्टि की रक्षा हेतु भगवान शिव ने उस विष का पान कर लिया। इस हलाहल विष को पीने से उनका पूरा शरीर तपने लग गया। विष का प्रभाव इतना तीव्र था की शिव जी का कंठ नीला पड़ गया। विष की तीव्रता से उनके शरीर को बचाने के लिए देवताओं ने उनके ऊपर जल डालना प्रारंभ किया जिसके कारणवश उस विष का प्रभाव देवी गंगा पर भी पड़ने लगा परंतु शिव जी के शरीर की तपन कम नहीं हुई।


तभी सब देवताओं ने उनसे दूध ग्रहण करने का निवेदन किया। शिव जी के दूध ग्रहण करने के बाद विष की तीव्रता कम हो गई और उनके शरीर की तपन शांत हो है। तभी से भगवान शिव को दूध अति प्रिय है। इसी वजह से भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर दूध अर्पित किया जाता है। विषपान से भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया था इसी कारण से उन्हे नीलकंठ भी कहा जाता है। 


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शिवलिंग पर दूध चढ़ाने के पीछे वैज्ञानिक कारण


क्या आप जानते है की शिवलिंग पर दूध अर्पण करने के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण है। देशभर में ज्यादातर शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग समुद्र, नदी और कुए के पास है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे ऋषि मुनियों ने यह व्यवस्था की थी कि जब शिवलिंग पर दुग्धाभिषेक किया जाएगा तो उसे इकट्ठा करके गरीबों में बांट दिया जाएगा या उसका चरणामृत बना कर प्रसाद के रूप में बांट दिया जाएगा। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखे तो ज्यादातर शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग उस स्थानों पर है जहा radioactive elements निकलते है और दूध, धतूरा, बेलपत्र उन elements को सोख लेते है। 


दूध के प्रयोग से दरिद्रता कैसे दूर होगी?


सोमवार रात्रि को एक पात्र में गाय का कच्चा दूध ले और इसमें चांदी का सिक्का एवं एक चम्मच मधु डाले। इस पात्र को चंद्रमा की रौशनी मे रख दे। अब चंद्रमा की रौशनी मे बैठकर "ॐ दारिद्र्य दुःख दहनाय नमः शिवाय" मंत्र का जाप करे। मंत्रोच्चारण के पश्चात इस दूध को प्रसाद के रूप में ग्रहण करे। सोमवार के दिन प्रातःकाल उठकर शिव जी की विधिपूर्वक पूजा करे और जरूरतमंदों को दूध का दान करे। शिवलिंग पर दूध अर्पण करने से पहले एक बात का ध्यान रखे की दूध व्यर्थ न हो। 


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